आम के बौर इत्र की तरह गमक रहे थे। पलाश के लाल नारंगी फूल अपना शामियाना तानने की तैयारी में थे। कोयलों ने कुहुक-कुहुक विविध भारती गाना शुरू कर दिया था। (Location 740)
जब कोई आदमी देह, हाथ या कोई भी ऊपर-नीचे का अंग-विशेष खुजलाते हुए कोई बात पूछे या कहे तो यह समझ लेना चाहिए कि वो आदमी उस बात में कतई रुचि नहीं ले रहा, न सुनना चाह रहा है और जल्द-से-जल्द उसे टालना चाहता है। क्योंकि अभी वह केवल नोचनी का आनंद लेना चाहता होता है और वो चाह रहा होता है कि सामने वाला आदमी जाए यहाँ से। (Location 1502)
असल में जहाँ खुद पंच परमेश्वर वास करते हों वहाँ पत्थरों के परमेश्वर ऐसे ही उपेक्षित हो ही जाते हैं। (Location 1685)
भारत में छुआछूत की बीमारी की सबसे बड़ी विशेषता यही रही थी कि यह बीमारी बस किसी खास एक जाति या वर्ग द्वारा पोषित नहीं, किसी एक जात की बपौती नहीं थी। यहाँ हर जाति के नीचे एक जाति थी। भारत में सबसे ऊपर की जाति तो खोजी सकती थी पर सबसे निचली जाति खोजना अभी तक बाकी था। यहाँ हर जाति के लिए कोई न कोई जाति अछूत थी। तेली के लिए हरिजन अछूत था, यादव के लिए तेली अछूत था, क्षत्रिय के लिए दोनों अछूत थे, ब्राह्मण के लिए तो सब अछूत थे। मानव का मनोविज्ञान बताता है कि वह स्पर्श से आनंद पाता है लेकिन किसी को न छूने का आनंद भारतीय जाति व्यवस्था की अपनी मौलिक रसोत्पत्ति थी। (Location 3288)
New highlights added August 11, 2021 at 9:05 PM
लोक में लुक का अपना अलगे महात्म्य होता। लुक के कारण ही यहाँ व्यापारी बाबा कहलाता, भोगी योगी माना जाता। (Location 3810)
“अक्सर ज्यादातर आदमी अपनी जवानी के दौर में समाजवादी, नारीवादी या मार्क्सवादी में से कुछ-न-कुछ जरूर होता है और एक दौर के बाद वो निश्चित रूप से इनमें से कुछ भी नहीं होता है। सिर्फ कमाता-खाता आदमी होता है।” (Location 4011)
संविधान अच्छा या बुरा नहीं, यह उसे चलाने वाले पर निर्भर करेगा। (Location 4072)
महानगरों में दो प्रकार का नारीवाद प्रचलन में था। एक तो हर नारी में माँ, बहन देखना और दूसरा कि चाहे माँ, बहन या कोई हो सबमें नारी देखना। (Location 4097)
“अरे चंदन, ऐज में तुमसे बड़ा हैं, तुमसे ज्यादा ही पिए होंगे हम गाँजा। उसका बात अलग है, वो जड़ी-बूटी है भाई। मछरवा वाला में केमिकल होता है मर्दे। सुनते हैं हानि करता है।” (Location 4245)
ऊँचे लोग अक्सर सुविधा और जरूरत के हिसाब से नीचे आ, नीचे वाले के साथ नीचे बैठ इतिहास रच देते और इतिहास दर्ज कर पुनः यथावत अपनी ऊँची अवस्था को चले जाते। वे उन्हें ऊँचाई पर आकर साथ नहीं बैठने देते, इसे ही शायद क्रांति कहा जाता होगा जिसके साकार होने की बाट अभी सभ्यता को बहुत समय तक जोहनी थी। (Location 4515)
New highlights added August 13, 2021 at 3:08 PM
कभी-कभी विकल्पहीनता ही आदमी को साहसी बना देती है। (Location 6172)
“नहीं बेटा, भाग्य तो बस कच्चा माल है। कर्म ही उसे पकाने वाला ईंधन है। (Location 6504)
“समझ गया। जिसके भाग्य में कुछ नहीं होता, सब कुछ उसके हाथ में होता है।” (Location 6517)
अभागा तो ईश्वर का भेजा गया वो भरोसेमंद प्राणी है जिसे ईश्वर इस विश्वास के साथ भेजता है कि इसे कुछ भी खैरात देकर मत भेजो, ये सब कुछ खुद हासिल कर लेगा अपने पराक्रम से।” (Location 6528)
भाग्यशाली ईश्वर के दया का पात्र है और अभागा प्रेम का।” (Location 6534)
आत्मविश्वास वो ईंधन है जो ज्ञानी में हो तो विनम्रता बढ़ाता है और मूर्ख में हो तो अहंकार।” (Location 6539)
सूर्य सबके लिए उगता है न, फिर भी कुछ ही को रास्ता दिखता है और कुछ लोग रोशनी के बावजूद अँधेरे में भटकते हैं। जानते (Location 6552)
New highlights added August 14, 2021 at 10:50 AM
सभ्य लोगों ने सनक की लड़ाई और हक की लड़ाई के बीच में कभी कोई फर्क समझना जरूरी नहीं समझा। (Location 6857)
Aughad
Metadata
Author: Nilotpal Mrinal
Full Title: Aughad
Category: #type/books
Highlights
आम के बौर इत्र की तरह गमक रहे थे। पलाश के लाल नारंगी फूल अपना शामियाना तानने की तैयारी में थे। कोयलों ने कुहुक-कुहुक विविध भारती गाना शुरू कर दिया था। (Location 740)
जब कोई आदमी देह, हाथ या कोई भी ऊपर-नीचे का अंग-विशेष खुजलाते हुए कोई बात पूछे या कहे तो यह समझ लेना चाहिए कि वो आदमी उस बात में कतई रुचि नहीं ले रहा, न सुनना चाह रहा है और जल्द-से-जल्द उसे टालना चाहता है। क्योंकि अभी वह केवल नोचनी का आनंद लेना चाहता होता है और वो चाह रहा होता है कि सामने वाला आदमी जाए यहाँ से। (Location 1502)
असल में जहाँ खुद पंच परमेश्वर वास करते हों वहाँ पत्थरों के परमेश्वर ऐसे ही उपेक्षित हो ही जाते हैं। (Location 1685)
भारत में छुआछूत की बीमारी की सबसे बड़ी विशेषता यही रही थी कि यह बीमारी बस किसी खास एक जाति या वर्ग द्वारा पोषित नहीं, किसी एक जात की बपौती नहीं थी। यहाँ हर जाति के नीचे एक जाति थी। भारत में सबसे ऊपर की जाति तो खोजी सकती थी पर सबसे निचली जाति खोजना अभी तक बाकी था। यहाँ हर जाति के लिए कोई न कोई जाति अछूत थी। तेली के लिए हरिजन अछूत था, यादव के लिए तेली अछूत था, क्षत्रिय के लिए दोनों अछूत थे, ब्राह्मण के लिए तो सब अछूत थे। मानव का मनोविज्ञान बताता है कि वह स्पर्श से आनंद पाता है लेकिन किसी को न छूने का आनंद भारतीय जाति व्यवस्था की अपनी मौलिक रसोत्पत्ति थी। (Location 3288)
लोक में लुक का अपना अलगे महात्म्य होता। लुक के कारण ही यहाँ व्यापारी बाबा कहलाता, भोगी योगी माना जाता। (Location 3810)
“अक्सर ज्यादातर आदमी अपनी जवानी के दौर में समाजवादी, नारीवादी या मार्क्सवादी में से कुछ-न-कुछ जरूर होता है और एक दौर के बाद वो निश्चित रूप से इनमें से कुछ भी नहीं होता है। सिर्फ कमाता-खाता आदमी होता है।” (Location 4011)
संविधान अच्छा या बुरा नहीं, यह उसे चलाने वाले पर निर्भर करेगा। (Location 4072)
महानगरों में दो प्रकार का नारीवाद प्रचलन में था। एक तो हर नारी में माँ, बहन देखना और दूसरा कि चाहे माँ, बहन या कोई हो सबमें नारी देखना। (Location 4097)
“अरे चंदन, ऐज में तुमसे बड़ा हैं, तुमसे ज्यादा ही पिए होंगे हम गाँजा। उसका बात अलग है, वो जड़ी-बूटी है भाई। मछरवा वाला में केमिकल होता है मर्दे। सुनते हैं हानि करता है।” (Location 4245)
ऊँचे लोग अक्सर सुविधा और जरूरत के हिसाब से नीचे आ, नीचे वाले के साथ नीचे बैठ इतिहास रच देते और इतिहास दर्ज कर पुनः यथावत अपनी ऊँची अवस्था को चले जाते। वे उन्हें ऊँचाई पर आकर साथ नहीं बैठने देते, इसे ही शायद क्रांति कहा जाता होगा जिसके साकार होने की बाट अभी सभ्यता को बहुत समय तक जोहनी थी। (Location 4515)
कभी-कभी विकल्पहीनता ही आदमी को साहसी बना देती है। (Location 6172)
“नहीं बेटा, भाग्य तो बस कच्चा माल है। कर्म ही उसे पकाने वाला ईंधन है। (Location 6504)
“समझ गया। जिसके भाग्य में कुछ नहीं होता, सब कुछ उसके हाथ में होता है।” (Location 6517)
अभागा तो ईश्वर का भेजा गया वो भरोसेमंद प्राणी है जिसे ईश्वर इस विश्वास के साथ भेजता है कि इसे कुछ भी खैरात देकर मत भेजो, ये सब कुछ खुद हासिल कर लेगा अपने पराक्रम से।” (Location 6528)
भाग्यशाली ईश्वर के दया का पात्र है और अभागा प्रेम का।” (Location 6534)
आत्मविश्वास वो ईंधन है जो ज्ञानी में हो तो विनम्रता बढ़ाता है और मूर्ख में हो तो अहंकार।” (Location 6539)
सूर्य सबके लिए उगता है न, फिर भी कुछ ही को रास्ता दिखता है और कुछ लोग रोशनी के बावजूद अँधेरे में भटकते हैं। जानते (Location 6552)
सभ्य लोगों ने सनक की लड़ाई और हक की लड़ाई के बीच में कभी कोई फर्क समझना जरूरी नहीं समझा। (Location 6857)